Posts

COVID-19: आखिर कोरोना वायरस से कितनी बदल जाएगी दुनिया, पढ़े पूरी खबर.

Coronavirus:  कोरोना वायरस के प्रकोप से जूझ रही दुनिया के बारे में अगर इस वक्त कुछ अनिश्चय कायम हैं तो ऐसी कई नई संभावनाएं भी पैदा हो गई हैं, जिनसे विश्व में कई बदलावों की उम्मीद की जा रही है। अनिश्चय इसका है कि आखिर कैसे यह बीमारी काबू में आएगी और इसके कारण उलट-पुलट व्यवस्थाएं कितने दिनों तक इसी तरह अराजकता की शिकार रहेंगी। संभावनाओं की तरफ गौर करें तो प्रतीत होता है कि इस संक्रमण से संसार कई ऐसे सबक लेगा जो एक बेहतर दुनिया बनाने का भरोसा जगाएंगे और मानवता के वास्तविक प्रतिमान हमारे सामने रखेंगे। मानव व्यवहार और दिनचर्या :  महामारियों के इतिहास को देखने से पता चलता है कि जब कोई रोग दुनिया के बड़े फलक पर फैलता है तो वह न केवल लोगों के रहन-सहन को पूरी तरह बदल देता है, बल्कि व्यापार, राजनीति और अर्थव्यवस्थाओं के संचालन के तौर- तरीकों पर भी नाटकीय असर डालता है। कोविड-19 नामक बीमारी यानी कोरोना वायरस के संक्रमण से जो पहली चीज बदलने वाली है, वह सामान्य मानव व्यवहार और हमारी दिनचर्या है। आज यह एक सामान्य मानव व्यवहार है कि लोग अपने घर-परिवार, मित्रों, सहयोगियों और सहयात्रियों के साथ ...

COVID-19 और भारत की तैयारी.

संदर्भ COVID -19 वायरस आज भारत समेत दुनिया भर में स्वास्थ्य और जीवन के लिये गंभीर चुनौती बनकर खड़ा है। अब पूरी दुनिया में इसका असर भी दिखने लगा है। वैश्वीकरण के इस दौर में जहाँ आवागमन और संचार व्यवस्था सुगम हुई है, वहीं आपसी संपर्क बढ़ने से पूरा विश्व किसी गंभीर बीमारी के प्रति सुभेद्य हो गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation-WHO) के अनुसार, लगभग 70 देशों में 95000 से अधिक लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। दुखद बात यह है कि पूरे विश्व में इस संक्रमण से लगभग 3221 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। जनसंख्या घनत्व, गरीबी और अशिक्षा जैसे कारकों के साथ भारत का अपर्याप्त स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचा भारत को COVID -19 के लिये अत्यधिक संवेदनशील बनाता है। भारत ने अब तक COVID -19 संक्रमण के 28 पाॅज़िटिव मामलों की सूचना दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय अपने  एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (Integrated Disease Surveillance Programme-IDSP)  नेटवर्क के माध्यम से उन लोगों का पता लगाने का प्रयास कर रहा है जो उन 28 लोगों के संपर्क में आए हैं। चूँकि COVID -19 एक श्वसन आधारित वायरस है, इसलिये...

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन के निर्यात पर प्रतिबंध समाप्त

चर्चा में क्यों? हाल ही में भारत सरकार ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन (Hydroxychloroquine- HCQ) के निर्यात पर लगाए गए अपने पूर्व के प्रतिबंध को समाप्त कर इसके निर्यात की अनुमति दे दी है। मुख्य बिंदु: भारत सरकार ने 7 अप्रैल, 2020 को मलेरिया के उपचार में प्रयोग की जाने वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन के साथ कुछ अन्य दवाओं के निर्यात की अनुमति दे दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार,  COVID-19  महामारी के मानवीय पहलुओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इसके तहत भारत पर आश्रित (दवाओं के संदर्भ में) पड़ोसी देशों के लिये पैरासिटामाॅल और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन की उचित मात्रा को निर्यात करने की अनुमति दी गई है। साथ ही इन आवश्यक दवाओं को उन देशों में भी भेजा जाएगा जो इस महामारी से विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं। केंद्र सरकार के अनुसार, वर्तमान में निर्यात के लिये स्वीकृत HCQ और अन्य दवाएँ देश में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। सरकार के इस निर्णय के तहत दवाओं के स्टॉक की स्थिति और घरेलू मांग के आधार पर ही इन दवाओं का निर्यात किया जाएगा। ध्यातव्य है कि 25 मार्च, 2020 को विदेश व्यापार महानिदेशालय ...